SONG:-HARYANA KI GARMI LYRICS:-PRADEEP PAL DESI ROCK ARTIST:- BANTA BHAI, RAHUL TOMAR SINGER:- PRADEEP PAL DESI ROCK LEBLE:- @PradeepPalDesiRock3309
SONG LYRICS 👇
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी सूरज बाबा आग लगावे गात पसीना घणा बहावे बाहर निकलना ओखा होया भीतर बैठा जी घबरावे हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी तड़के-तड़के धूप चढ़ गई जणु लाठ सी लेकर खड़ी खेत-क्यारी खाली हो गई गाम की गाल भी सूनी पड़ी कूलर-पंखे हार गए रे धोरे सारे मार गए रे हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी बिजली आवे बिजली जावे इन्वर्टर भी घुर-घुर गावे मटके का भी पाणी ताता किसे ढाल नी आता साता सूती कुर्ता तन पे डाळ्या धूप ने सारा रूप जलाळ्या हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी सड़क पे उड़ती दिखे रे रेत, तपने लागे सारे खेत। ठंडी लस्सी, निंबू-पाणी, याद आवे है नानी-दादी। ऐसी लू की मार पड़ी, जीने की भी आफत आन खड़ी। हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी ऑफिस हो या घर की छत, गर्मी ने तो मारी मत। AC भी अब फेल होया, मच्छर भी अब शेर होया। प्रदीप पाल भी बाट देखे, कद बादल बरसावे अमृत के। हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी बादल राजा फेरा पा दे ठंडी सी कोई हवा चला दे बरखा रानी प्यास बुझा दे बालक-बूढ़े मौज करा दे हरियाणा का छोरा तप्पे प्रदीप पाल बिन बारिश तड़पे हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी हो आफत ढा दी हाय री गर्मी बदला ले रही हाय री गर्मी...
SONG:-HARYANA KI GARMI
ReplyDeleteLYRICS:-PRADEEP PAL DESI ROCK
ARTIST:- BANTA BHAI, RAHUL TOMAR
SINGER:- PRADEEP PAL DESI ROCK
LEBLE:- @PradeepPalDesiRock3309
SONG LYRICS 👇
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
सूरज बाबा आग लगावे
गात पसीना घणा बहावे
बाहर निकलना ओखा होया
भीतर बैठा जी घबरावे
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
तड़के-तड़के धूप चढ़ गई
जणु लाठ सी लेकर खड़ी
खेत-क्यारी खाली हो गई
गाम की गाल भी सूनी पड़ी
कूलर-पंखे हार गए रे
धोरे सारे मार गए रे
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
बिजली आवे बिजली जावे
इन्वर्टर भी घुर-घुर गावे
मटके का भी पाणी ताता
किसे ढाल नी आता साता
सूती कुर्ता तन पे डाळ्या
धूप ने सारा रूप जलाळ्या
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
सड़क पे उड़ती दिखे रे रेत,
तपने लागे सारे खेत।
ठंडी लस्सी, निंबू-पाणी,
याद आवे है नानी-दादी।
ऐसी लू की मार पड़ी,
जीने की भी आफत आन खड़ी।
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
ऑफिस हो या घर की छत,
गर्मी ने तो मारी मत।
AC भी अब फेल होया,
मच्छर भी अब शेर होया।
प्रदीप पाल भी बाट देखे,
कद बादल बरसावे अमृत के।
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
बादल राजा फेरा पा दे
ठंडी सी कोई हवा चला दे
बरखा रानी प्यास बुझा दे
बालक-बूढ़े मौज करा दे
हरियाणा का छोरा तप्पे
प्रदीप पाल बिन बारिश तड़पे
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी
हो आफत ढा दी हाय री गर्मी
बदला ले रही हाय री गर्मी...